संस्था द्वारा धार्मिक शिक्षण शिविरो हेतु बालबोध (चारों भाग), छहढ़ाला, द्रव्य संग्रह तथा वर्ण व्यवस्था, अवध निर्देशिका, जैन ला, करणानुयोग दीपक, ऐसे थे चारित्र चक्रवर्ती, आगम पथ, विदेशों में जैन धर्म, चिन्तन प्रवाह, दशलक्षण मण्डल विधान, सुहेल बावनी, महासभा की प्रगति रिपोर्ट, नैतिक शिक्षाप्रद कहानियां, बालबोध जैन धर्म आदि महत्वपूर्ण साहित्य का नवीन या पुनप्र्रकाशन हुआ है।
                  दिनांक 7.1.2010 की स्थिति के अनुसार जैन गज़ट के 15 संस्कृति शिरोमणि संरक्षक, 258 शिरोमणि संरक्षक, 556 परम संरक्षक, 25 संरक्षक, 5163 आजीवन, 2191 वार्षिक सदस्य हैं। महासभा के 1378 आजीवन सदस्य, 23 त्रैवार्षिक तथा 2952 साधारण आजीवन सदस्य हैं। इसी प्रकार जैन महिलादर्श की 127 शिरोमणि संरक्षिका, 159 परम संरक्षिका, 9 संरक्षिका, 2501 आजीवन एवं 1841 वार्षिक सदस्य हैं।
                 वर्तमान में संस्था के 20 प्रचारक हैं। देश भर में जगह-जगह (जैन गजट) संवाददाता 158, जैन महिलादर्श संवाददाता 36 तथा संयोजक (महासभा) 67 हैं जो जगह-जगह संस्था के व जैन गजट तथा जैन महिलादर्श के सदस्य बना रहें हैं तथा प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
                जैन गज़ट के पूर्व सम्पादक प्राचार्य श्री नरेन्द्र प्रकाश जी के शब्दों में महासभा दिगम्बर जैन समाज की एक प्राचीनतम संस्था है। यह उस झील की तरह है, जिसमें से अनेक नदियां निकलती हैं। जिन सिद्धान्तों के साथ 19वीं सदी के प्रारंभ में इसका जन्म हुआ था, आज 21 वीं सदी की देहरी पर खड़े होकर भी वह उन्हीं सिद्धान्तों की डोर से बंधी हुई है। संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि धर्म के प्रति दृढ़ आस्था रखने वाले उस समुदाय का ही दूसरा नाम है महासभा।
               इधर पिछले 15 वर्षों से महासभा के कार्यों में जो गति आयी है तथा उसके मुखपत्र जैन गज़ट की ग्राहक संख्या में आशातीत बढ़ोत्तरी हुई है, उससे इस संस्था की लोकप्रियता का ही परिचय मिलता है। आज महासभा के कार्यालय में बैठकर दर्शक को ऐसा लगता है कि जैसे वह किसी बड़े राष्ट्रीय पत्र के कार्यालय में आ गया हो। इस समय यहाँ पर कार्यरत कर्मचारी एक मिशनरी स्पिरिट से समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं । यहाँ से संचालित विविध प्रकल्पों के रख-रखाव और व्यवस्थित रिकार्ड को देखकर सभी को भारी प्रसन्नता होती है।
           महासभा के विकास की इस यात्रा में महासभाध्यक्ष श्री निर्मल कुमार जी जैन सेठी का योगदान स्तुत्य है।
          आज से कुछ वर्ष पहले, जिन्होने कार्यालय का अवलोकन किया होगा, वे आज यकायक पुनः उसे देखें तो सुखद आश्चर्य हुये बिना नहीं रहेगा। बहुत परिश्रम करके महासभा के सभी यशस्वी पूर्व अध्यक्षों एवं सम्पादकों के चित्र सुलभ करके कार्यालय में लगाये गये हैं। यहाँ की दीवारों पर लगे काष्ठ पट्टों पर संस्कृति शिरोमणि संरक्षक, परम संरक्षक एवं आजीवन सदस्यों की सूची भी देखी जा सकती है। केन्द्रीय कार्यालय में टेलीफोन, फैक्स, इन्टरनेट, वेबसाइट सुविधा भी उपलब्ध है।
   
 
Design develop by www.webweavers.in