महासभा को दिगम्बर जैन परम्परा के 20वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज एवं आचार्यों - आचार्य श्री वीरसागरजी महाराज, आचार्य श्री महावीरकीर्ति जी महाराज, आचार्य श्री शिवसागरजी महाराज, आचार्य श्री धर्मसागरजी महाराज, आचार्य श्री देशभूषणजी मुनिराज, आचार्य श्री विमलसागरजी महाराज, आचार्य श्री सन्मतिसागरजी महाराज, आचार्य श्री अजितसागरजी महाराज, सिद्धांत चक्रवर्ती श्री विद्यानंदजी मुनिराज, आचार्य श्री वर्धमानसागरजी महाराज, आचार्य श्री बाहुबली सागरजी महाराज, आचार्य श्री कुन्थुसागरजी महाराज, आचार्य श्री पुष्पदंत सागरजी महाराज, आचार्य श्री देवनंदीजी महाराज, आचार्य श्री पदमनंदीजी महाराज, आचार्य श्री कनकनन्दीजी महाराज, आचार्य श्री श्रेयांससागरजी महाराज, आचार्य श्री अभिनंदनसागरजी महाराज, आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज, आर्यिकारत्न श्री इन्दुमति माताजी, आर्यिका श्री विमल मति माताजी, आर्यिका गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमति माताजी, आर्यिका गणिनी श्री सुपाश्र्वमति माताजी, आर्यिका गणिनी श्री विशुद्धमति माताजी (सतना), आर्यिका गणिनी श्री विजयमति माताजी एवं आर्यिका गणिनी श्री विशुद्धमति माताजी (एटा) तथा समस्त मुनि संघांे, आर्यिका संघों, ऐलकों, क्षुल्लकों, भट्टारकों का आशीर्वाद व सकल भारतवर्षीय चतुर्विध संघ का सतत् सहयोग प्राप्त करने का सौभाग्य रहा है। |