श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा
Shri Bharatvarshaiya Digamber Jain T. S. Mahasabha
उद्देश्य
आपका सहयोग अपेक्षित है :-
प्राचीन उपेक्षित तीर्थों/मन्दिरों/मूर्तियों/कलाकृतियों/पाण्डुलिपियों की जानकारी प्रदान करना।
आर्थिक सहायता राशि देकर अथवा किसी भी उपेक्षित तीर्थ/स्मारक के संरक्षण एवं जीर्णोंद्धार हेतु गोद (दत्तक) लेकर।
प्रचार-प्रसार सामग्री/शिविर/सेमीनार को अपने सौजन्य से आयोजित करके।
मन्दिरों/धर्मशालाओं में प्राचीन तीर्थ जीर्णोद्धार हेतु गोलक रखकर।
महासभा कार्यालय से निःशुल्क गोलक मंगाकर अपने घरों एवं व्यापारिक स्थानों में रखें।
पंचकल्याणक महोत्सव, पर्युषण पर्व तथा अन्य किसी विशेष शुभ अवसरों पर आयोजित बोलियों का कुछ अंश प्राचीन पुरातन धरोहरों के उद्धार के लिए।
इस संस्था द्वारा अब तक निम्नांकित प्रमुख कार्य सम्पन्न किये गये हैं :
सर्वेक्षण कार्य-सुदूर पिछड़े, पर्वतीय एवं वन क्षेत्रों में जैन पुरातत्व/स्मारकों/मूर्तियों आदि का पता लगाने हेतु विभिन्न सम्भागों में पुरातत्वीय संयोजकों की नियुक्तियां की गई हैं।
निम्नांकित क्षेत्रों को महासभा द्वारा प्रकाश में लाया गया :-
महाराष्ट्र : आमगांव (गोंदिया), इब्राहिमपुर, अंजनेरी (नासिक), उमरगा (उस्मानाबाद), नेमगिरी जिन्तूर (उस्मानाबाद), तुमकर (उस्मानाबाद)।
कर्नाटक : मूलगुन्द एवं हरसुर (गुलबर्गा), चन्द्रगिरी हडवल्ली, गढ केश्वर (गुलबर्गा)।
राजस्थान : जावरमाईन्स में जैन मन्दिरों का समूह, आंतरी (डूंगरपुर), सुहागपुर, रायगढ (अजमेर)।
गुजरात : उमता एवं भिलोडा।
छत्तीसगढ : महेशपुर (अम्बिकापुर)
आन्ध्र प्रदेश :कुलचारम
पश्चिम बंगाल : पुरुलिया क्षेत्र में बिखरे जैन मन्दिर एवं पुरा धरोहर
मध्य प्रदेश : टिकटोली (मुरैना), आम्मी, करई
केरल : पंचकुटी एवं चन्द्रगिरी
उडीसा : कोरापूट, जैपुर, प्रतापनगर
संग्रहालय : मोहेन्द्रा (पन्ना), सीरोंन जी मड़ावरा
इसके अन्तर्गत कर्नाटक, तमिलनाडु एवं पश्चिम बंगाल के विभिन्न प्राचीन मन्दिरों/स्मारकों में संरक्षण एवं विकास कार्य चल रहे हैं।
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